कितनी बातें याद आतीं हैं, तसवीर ऐसी बन जाती हैं...इनहें कैसे मैं भूलू...या दिल को समझा लू.....
जाने तुम कहा चली गई....मुझे आज भी याद हैं वो दिन जो हमनें साथ बीताऐ ...स्कूल़ में एक ही सीट पे बैठना...वो तुम्हारा मेरे लिए खाना लाना.., मेरे सारा काम पुरा करना..एक दोस्त कि तरह मेरा खयाल रखना ...माँ कि तरह care करना और पापा कि तरह डाटना भी...शायद तुम जानती थी कि मैं अपने अपनो से कभी नहीं मिला या फिर शायद तुम्हे भी मुझसे प्यार ....मुझे अपना b'day नहीं पता कि कब मैं इस दुनिया में आया पर हां जब मैं तुमसें मीला तब मालूम पड़ा कि आया हूं तो बस तुम्हारें लीए...वो दिन आज भी याद हैं मुझे जब तुम घुटनो पे बैठी थीं मेरे लिये....एसा लगा जैसें सब कुछ रूक गया वहीं....पहले प्यार का इहसासं ही अलग होता है.....मेरे लिये खास था...क्योकि मुझे तो कभी किसी से pyar मिला ही नहीं...कोई नहीं था मुझे पूछने वाला...ना माँ..ना ही बाबा...ना कोई भाई और ना ही बहन...
सब कहतें हैं हम अकेलें ही आतें हैं और जाना भी अकेले ही पड़ता हैं....पर जब से तुम मिलि मुझे हर पल यहीं सोचता था कि आए भलें ही अकेला हूं पर जाउंगा तो तुम्हारे ही साथ.....
पर एक दिन तुम अचानक से चली गई..बहुत दूर....मुझे बीना कुछ कहें....बहुत ढुढां तुम्हे मैनें पर तुम कहीं नहीं थीं...बहुत हिम्मत करके मैं तुम्हारे घर गया...डर रहा था कि तुम मुझे क्या कहोगी...लेकिन जानना चाहता था कि क्यों चली गई तुम वो भी बीना कुछ कहें.....पर वहां के तो कुछ और ही नजा़रें थें....तुम तो पूरी तय्यार थी जानें....वहीं पीला सूट पहनें...जीसमें तुम मुझे सबसे ज्यादा पसंद थी....मेरी दी हुई पायल आज भी तुम्हारें पैरों में...हाथ में वहीं लाल चूड़ी और एक बड़ी सी Smile........
और ऊपर से सफेद चादर में.........
तुम जा रही थी मुझसे दूर ....बहूत दूर.... इतनी दूर कि चाहूं भी तो वापस नहीं ला पाऊगां .......कुछ छोड़ गई थी तुम मेरे लिए अपनी यादें...क्या इतना पराया हों गया था मैं कि तुमने मुझसे अपनें सुख तो बाटें पर दुःख नहीं....क्या सोचा तुमने कि मैं नहीं समझ पाऊंगा तुम्हारे र्दद को......पर तुम चली गई मुझे अकेला छोड़ के....... अपनी यादों के साथ.....जानता हूँ तू हैं मुझमे कहीं अब भी जींदा.... देखती हैं....अाज भी खयाल रखती हैं....आज तो चली गई मुझे छोड़ के पर अब जब मिलोगी तो जानें नहीं दुगां तुम्हें मैं....
I Miss you....I Miss you soo much
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Hey! I’m Shreya—a 20-something navigating life’s chaos with curiosity and heart. From moving solo to Kuwait to embracing imposter syndrome and homesickness, I write to reflect, grow, and stay grounded.
This blog is my yaadon ka pitara—a space for honesty, healing, and the little joys (like chai or a song on a walk). When I’m not writing, I’m talking endlessly, riding emotional waves, or soaking in big life shifts.
Thanks for being here. Let’s tell stories that matter—together.
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